Warnings before a heart attack may appear one month prior

आपको यह जानकार हैरानी हो सकती है कि अचानक दिल का दौरा (सडेन कार्डिएक अरेस्ट) पड़ने से एक महीने पहले ही हमारा दिल खतरे की घंटी बजा देता है लेकिन हम या तो इसे सुनकर नजरअंदाज कर देते हैं या इसे समझ नहीं पाते। वक्त रहते इनको समझ लेने से बडी संख्या में जाने बचाई जा सकती हैं।�
सडेन कार्डिएक अरेस्ट (एससीए) वह अवस्था है जहां दिल अचानक धडकना बंद कर देता है और मस्तिष्क के साथ ही शरीर के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों तक रक्त पहुंचना बंद हो जाता है। चिकित्सा विज्ञान में लंबे समय से यह कहा जा रहा है कि एससीए बिना किसी चेतावनी के पड़ता है लेकिन केडार्स-सिनाई हार्ट इंस्टीट्यूट के भारतीय सहायक निदेशक के नेतृत्व में हुए एक अध्ययन में पहली बार इस बात का पता चला है कि जिन लोगों को एससीए होता है उनमें से आधे से ज्यादा लोगों में एक महीने पहले ही इसके लक्षण दिखाई देने लगते है लेकिन वे या तो इसे नजरअंदाज कर देते हैं या फिर इन लक्षणों को समझ नहीं पाते।�
यह नया शोध एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से इस पर शोध किया जा रहा है। इंस्टीट्यूट में हार्ट रिदम सेन्टर के चिकित्सा निदेशक सुमीत सी. चुघ ने कहा, अधेड़ उम्र के लोगों पर अचानक दिल का दौरा पड़ने से समाज पर बुरा प्रभाव पड़ता है क्योंकि ये लोग अपने परिवार के लिए कमाने वाले मुख्य सदस्य होते हैं। अचानक हृदयाघात में सात प्रतिशत से भी कम लोग बच पाते है इसलिए इनके लक्षणों का पता लगाना मुश्किल काम था।
35 से 65 वर्ष उम्र के बीच के एससीए के 839 मरीजों पर किए गए इस शोध में पता चला है कि इन लोगों में रूक-रूककर सीने में दर्द और दबाव महसूस होना, सांस लेने में दिक्कत, दिल का जोर-जोर से धड़कना, मितली आना पेट और कमर में दर्द होने की शिकायतें आम थी।�
इंस्टीट्यूट के निदेशक एडुआर्डो मारबान ने कहा कि इस नए शोध के नतीजों से अब असामान्य संवेदनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अचानक मौत हो जाने के खतरे से बेहतर है जल्द ही इसका बचाव तलाशना। दुनियाभर में 50 प्रतिशत लोगों की मौत का कारण एससीए है। सामान्यत: दिल के दौरे और एससीए को एक जैसा समझा जाता है लेकिन यह एक-सा नहीं है। दिल का दौरा तब पड़ता है जब ह्दय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट पैदा हो जाती है। जबकि एससीए में हृदयागति अचानक बंद हो जाती है। लोग इसकी आहट को पहचान नहीं पाते है जिसके कारण उसी क्षण उनकी मौत हो जाती है। चुघ ने कहा, शोध से यह स्पष्ट है कि अचानक मौत उतनी अचानक नहीं होती। लोगों और चिकित्सकों को जागरुक एवं शिक्षित कर इससे बचा जा सकता है।

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