Sweet Patato:Who should consume it

शकरकंद या स्वीट पोटैटो का सेवन सर्दियों में लाभदायक होता है। सर्दियों में कंद-मूल अधिक फायदेमंद रहते हैं, क्योंकि ये शरीर को गर्म रखते हैं। शकरकंद की गहरे रंग की प्रजाति में कैरोटिनॉयड जैसे, बीटा-कैरोटीन और विटामिन ए अधिक मात्रा में पाया जाता है। 100 ग्राम शकरकंद में 400 फीसदी से अधिक विटामिन ए पाया जाता है। यह उच्च मात्रा वाला स्टार्च फूड है, जिसके 100 ग्राम में 90 कैलोरीज होती हैं। शकरकंद खाने में मीठा होता है। इसके सेवन से मोटापा, मधुमेह, हृदय रोगों और सम्पूर्ण तौर पर मृत्युकारक जोखिम कम होते हैं। यह आरोग्यवर्धक तथा ऊर्जा वर्धक होता है, पर वजन को कम करने में मददगार होता है।

विटामिन ए का सर्वश्रेष्ठ स्रोत

शकरकंद का ट्यूबर फ्लेवनॉइड्स फेनोलिक कंपाउंड्स जैसे बीटा-कैरोटीन तथा विटामिन ए का सबसे बड़ा स्रोत है। 100 ग्राम शकरकंद में 14187 आईयू विटामिन ए पाया जाता है, जो नजर तथा फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए एक आवश्यक तत्व है। विटामिन ए की कमी से ही आंखों के फोटोरिसेप्टर खराब होने लगते हैं और नजर कमजोर हो जाती है। विटामिन ए की कमी को दूर करने के लिए बीटा-कैरोटीन वाले आहार में शकरकंद सर्वश्रेष्ठ है। शकरकंद के पोषक तत्व से उम्र संबंधी मैक्यूलर डिजेनरेशन का जोखिम तथा बढ़ोतरी थम जाती है।

शकरकंद सेवन के फायदे-

मधुमेह

शकरकंद का ग्लाइसीमिक इंडेक्स स्केल कम होने की वजह से यह मधुमेह रोगियों के रक्त शर्करा को कम करने तथा इंसुलिन रेजिस्टेंस को नियंत्रित करता है। रक्त शर्करा को कम करने के लिए कम सोडियम इनटेक लेने की सलाह दी जाती है, जबकि शरीर में पोटेशियम इनटेक को नियंत्रित रखना भी जरूरी होता है, जो शकरकंद अच्छी तरह करता है। 200 ग्राम उबले शकरकंद में 27 फीसदी पोटेशियम होता है।

कैंसर

युवकों को बीटा-कैरोटिन की प्रचुरता वाला फूड लेने के लिए कहा जाता है, ताकि प्रोस्टेट कैंसर से बचाव हो सके। शकरकंद में बीटा-कैरोटीन की अच्छी मात्रा होती है, यह कोलोन कैंसर को फैलने से भी बचाता है। शकरकंद रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाता है। यह विटामिन सी और बीटा-कैरोटीन जैसे शक्तिशाली पोषक तत्वों का भंडार है। ये दोनों ही कई प्रकार के रोगों से शरीर की रोकथाम करते हैं।

सूजन

शकरकंद में पाए जाने वाले कोलाइन नामक तत्व को शरीर के लिए बहुत अहम माना जाता है। यह तत्व नींद, मांसपेशियों की गतिशीलता, सीखने तथा याद रखने में मदद करता है। ये तत्व कोशिका के आवरण के ढांचे को मेंटेन करने में मदद करता है। नर्व इम्पल्स के ट्रांसमिशन में मदद करता है। वसा के अवशोषण को सहायता प्रदान करता है और असाध्य सूजन को कम करता है। शकरकंद में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व आंतरिक और बाहरी सूजन जैसे हार्टबर्न, एसिडिटी और गठिया के इलाज में सहायक होते हैं।

दिल के रोग

शकरकंद में विटामिन बी-6 (पायरीडॉक्सिन) भरपूर मात्रा में होता है जो होमोसिस्टीन केमिकल के स्तर को कम करने में मदद करता है। होमोसिस्टीन एक प्रकार का एमीनो एसिड है जिसकी अधिकता से हृदय रोग हो सकते हैं। पोटेशियम से समृद्ध शकरकंद दिल की धड़कन और तंत्रिका संकेतों को नियंत्रित करने में सहायक होता है। पोटेशियम किडनी के कार्यों को नियंत्रित करने, सूजन को कम करने और मांसपेशियों में अकडऩ को समाप्त करने में भी मदद करता हैं।

किडनी रोगी ना खाएं शकरकंद

अगर आपकी किडनी सही तरह से काम नहीं कर पा रही हो, या आप किसी क्रोनिक किडनी के रोग से पीडि़त हैं, तो शकरकंद न खाएं, क्योंकि शकरकंद में पोटेशियम की अच्छी खासी मात्रा होती है। जब किडनी रक्त में मिले पोटेशियम को अलग नहीं कर पाती है, तो यह पोटेशियम शरीर के लिए घातक बन जाता है।

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