Skin to Skin Kangaroo Care for New Borns

न्यूयार्क। दुनियाभर में प्रत्येक वर्ष 40 लाख शिशुओं की विभिन्न कारणों से जन्म के एक महीने के भीतर ही मौत हो जाती है लेकिन एक शोध के अनुसार अगर समय से पूर्व जन्मे बच्चे (प्रीमेच्योर बेबी) को उसकी मां लंबे समय तक अपने सीने से चिपकाए रखे तो उसके जीवित रहने की संभावना काफी बढ़ जाती है। शोधकर्ताओं ने इसे कंगारू केयर का नाम दिया है। कंगारू केयर एक ऐसी पद्धति है जो स्किन टू स्किन कान्टैक्ट पर आधारित है। इसमें बच्चे और उसकी मां के बीच सीधा संपर्क रखना होता है अर्थात मां और बच्चे के शरीर के ऊपरी भाग में कोई कपड़ा नहीं होना चाहिए।बोस्टन में हावर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार जिस तरह कंगारू अपने बच्चों को अपने से चिपकाकर रखते है उसी तरह मां से चिपक कर रहने से नवजात को गरमाहट मिलती है और उसके शरीर का तापमान भी संतुलित रहता है। साथ ही इस प्रक्रिया से स्तनपान को भी बढ़ावा मिलता है और प्रसव के बाद घर पर ही शिशुओं की देखरख का यह अच्छा तरीका है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन भी शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए लंबे समय से कंगारू केयर को बढ़ावा देने की बात कह रहा है। इस तरीके से नवजात के रक्तप्रवाह में गंभीर संक्रमण सेप्सिस और बार-बार बीमार पडऩे का खतरा भी कम हो जाता है। समय से पूर्व जन्मे या कम वजन वाले नवजातों की मौत हो जाने, गंभीर बीमारी की चपेट में आने, धीमी गति से विकास होने और दीर्घकालीन बीमारी की आशंका ज्यादा होती है।

शोधकार्य के प्रमुख डॉ एलेन बाउंडी और वरिष्ठ लेखक डॉ. ग्रैस चान ने कहा, कंगारू केयर से शिशुओं को कई लाभ होने के सबूतों के बावजूद विश्व में इस तरीके का इस्तेमाल काफी कम होता है। उम्मीद है कि हमारे शोध से तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी कि कंगारू तरीके से नवजात की देखरेख करने के कई फायदे है।

पहले प्रकाशित 124 अध्ययनों के विश्लेषण से पता चला है कि कंगारू तरीके से देखरेख करने से कम वजन वाले नवजातों की मृत्यु दर में 35 प्रतिशत की कमी आई। विश्लेषण में सामने आया कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद कंगारू केयर करने वाली महिलाओं में अपने बच्चे को स्तनपान कराने की प्रवृत्ति 50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।

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