New Gene responsible for long life

न्यूयार्क। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक नए शोध से पता लगाया है कि जीन वेरियंट ( अनुवाशिंकी परिवर्तन) का कोशिका वार्धक्य (बुढ़ापा) और लंबी आयु से गहरा संबंध होता है। इसके साथ रोगप्रतिरोधक क्षमता और अल्जाइमर रोग यह जानने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है कि हम सौ वर्ष तक जी सकते हैं या नहीं। इस अध्ययन के अनुसार, साधारण लोगों की तुलना में 100 साल की आयु वाले लोगों (शतायु) में कई रोगों की अनुपस्थिति होती है।

इससे पहल किए अध्ययनों में देखा गया है कि सौ वर्ष के लोगों का स्वास्थ्य और आहार साधारण व्यक्ति के समान ही होता है लेकिन इन व्यक्तियों की अनुवांशिक बनावट (जेनेटिक मेकअप) इनकी लंबी उम्र का कारक हो सकती है। जेनेटिक मेकअप किसी भी व्यक्ति की ऊर्जा का महत्वपूर्ण कारक होता है।

इसके साथ ही हालांकि अनुवांशिकी से पहले हुए अध्ययनों में वैज्ञानिकों को केवल एक ही कोशिका (एपीओई, जो अल्जाइमर रोग के लिए प्रसिद्ध है) मिली है जो शतायु में सामान्य उम्र के लोगों से अलग होती है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के क्रिस्टीन फोर्टनी और उनके सहयोगियों ने दीर्घायु वाले जीन की खोज करते हुए एक नए सांख्यिकी विधि को विकसित किया है। इसका नाम (इन्फॉम्र्ड जीडब्लूएएस) है। यह 14 विभिन्न रोगों के दरा लंबी उम्र से जुड़े जीन की खोज की जानकारी देती है।

इस \’आईजीडब्लूएएसÓ विधि की सहायता से वैज्ञानिकों ने लंबी आयु के लिए साइकोलॉजिकल क्रियातंत्र से जुड़े लंबी आयु वाले जीन्स का पता लगाया है। शोधार्थी कहते हैं कि इससे साफ पता चलता है कि सभी रोगों की घटनाएं उम्र के साथ बढ़ती जाती हैं, इसलिए लंबी आयु के लिए अनुवांशिकी को समझना बेहद जरूरी है।

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