Homemade Cure for “DAAD”

दाद के लिए हर्बल उपचार

दाद या रिंगवार्म एक फंगल इंफेक्‍शन है, जो त्‍वचा, नाखूनों और स्‍कैल्‍प को प्रभावित करता है। ये लाल या हलके ब्राउन रंग का गोल आकार का होता है। दाद शरीर के जिस भाग पर होता है उस भाग पर खुजली मचती है और जब व्यक्ति इसे खुजलाने लगता है तो यह और भी फैलने लगता है। गीलेपन, नमी और भीड़-भाड़ वाली जगह पर यह ज्‍यादा फैलता है। टिनिआ रिंगवार्म का मेडिकल नाम है। हालांकि यह सोरायसिस की तरह खतरनाक नहीं है। और फार्मेसियों के यहां मिलने वाली दवाओं से इसका इलाज आसानी से हो जाता है। लेकिन आप कुछ घरेलू उपायों द्वारा भी इसका इलाज कर सकते हैं।

लहसुन का अर्क

लहसुन में प्राकृतिक एंटी-फंगल तत्‍व पाये जाते है, जो दाद सहित कई प्रकार के फंगल इंफेक्‍शन को ठीक करने में सहायक होते हैं। लहसुन को छिलकर उसके छोटे-छोटे टुकड़े कर उसका अर्क निकालकर दाद पर लगाने से आराम मिलता है। इस अर्क में जैतून का तेल और शहद मिलाने से यह घरेलू उपाय और अधिक प्रभावी हो जाता है।

नारियल का तेल

नारियल का तेल दाद के लिए सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपायों में से एक है, क्‍योंकि कवक के कारण होने वाले त्‍वचा संक्रमण को पूरी तरह से ठीक करने में मदद करता है। नारियल के तेल में जादू संघटक मध्‍यम श्रृंखला चैन फैटी एसिड (MCFA) विशेष रूप से लोरिक एसिड है। यह एसिड दाद संक्रमण के इलाज करने में बहुत मदद करते हैं। दाद वाले हिस्‍से पर थोड़ा सा नारियल तेल लेकर थोड़ी देर मसाज करें। इस उपाय को दिन में 3 से 4 बार करें।

 

टी ट्री ऑयल

चाय के पेड़ (Melaleuca alternifolia) से निकाले गए उत्कृष्ट एंटी-फंगल और एंटी-सेप्टिक टी ट्री ऑयल दाद के लिए सबसे अच्छा उपचार में से एक है। बस आपको जरूरत है, 100 प्रतिशत शुद्ध तेल का उपयोग की क्‍योंकि अन्य तेलों के साथ मिक्‍स करने से दाद का इलाज नहीं हो सकता।

 

एप्पल साइडर सिरका

एप्‍पल साइडर सिरका में मौजूद एंटी-फंगल गुण, अत्‍यधिक अम्‍लीय गुणों के कारण जाना जाता है। कवक अत्‍यधिक अम्‍लीय वातावरण में पैदा नहीं हो सकते है। इसलिए इसके नियमित इस्‍तेमाल से दाद को पूरी तरह से समाप्‍त किया जा सकता है।
दाद होने पर एप्‍पल साइडर सिरके को कॉटन बॉल पर लेकर संक्रमित हिस्‍से पर लगाये। इस उपाय को दिन में 3-4 बार करें। और दाद के पूरी तरह से ठीक होने तक इस उपाय को नियमित रूप से करें।

 

कच्चा पपीता

कच्चा या हरा पपीता बाहरी परत से पुरानी मृ‍त कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करता है। बाहरी परत त्‍वचा की ऐसी जगह जहां पर दाद कवक बढते है। कच्‍चे पपीते में मौजूद कई प्रकार के एंजाइम जैसे पैपेन और चयमोपैपेन के कारण ऐसा होता है।
यह एंजाइम वायरस, यीस्‍ट और कवक के विभिन्‍न प्रकार की रक्षा ढा़ल को नष्‍ट करने में मदद करते है। साथ ही दोनों एंजाइम सूनज और जलन को दूर करते है। इस प्रकार से पपीता दाद संक्रमण के इलाज का एक बहुत ही अच्‍छा उपाय साबित हो सकता है।

 

 

references

http://www.onlymyhealth.com/